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शल्य पर्व
अध्याय ४३
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वैशम्पाय़न उवाच
ऐश्वर्याणि हि सर्वाणि देवगन्धर्वरक्षसाम् |  ४६   क
भूतय़क्षविहङ्गानां पन्नगानां च सर्वशः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति