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शल्य पर्व
अध्याय ४३
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वैशम्पाय़न उवाच
पुण्यां हैमवतीं देवीं सरिच्छ्रेष्ठां सरस्वतीम् |  ५१   क
समन्तपञ्चके या वै त्रिषु लोकेषु विश्रुता ||  ५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति