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आदि पर्व
अध्याय ४४
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सूत उवाच
स्वैरेष्वपि न तेनाहं स्मरामि वितथं क्वचित् |  ११   क
उक्तपूर्वं कुतो राजन्साम्पराय़े स वक्ष्यति ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति