अनुशासन पर्व  अध्याय ४४

भीष्म उवाच

यत्किञ्चित्कर्म मानुष्यं संस्थानाय़ प्रकृष्यते |  २०   क
मन्त्रवन्मन्त्रितं तस्य मृषावादस्तु पातकः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति