भीष्म पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

सर्वगुह्यगुणोपेत विश्वमूर्ते निरामय़ |  ४६   क
विश्वेश्वर महावाहो जय़ लोकार्थतत्पर ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति