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विराट पर्व
अध्याय ४
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धौम्य उवाच
न च सन्दर्शने किञ्चित्प्रवृद्धमपि सञ्जपेत् |  २३   क
अपि ह्येतद्दरिद्राणां व्यलीकस्थानमुत्तमम् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति