आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ४४

वैशम्पाय़न उवाच

गम्यतां पुत्र पर्याप्तमेतावत्पूजिता वय़म् |  २६   क
राजा यदाह तत्कार्यं त्वय़ा पुत्र पितुर्वचः ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति