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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
इहैव शोषय़िष्यामि तपसाहं कलेवरम् |  ३८   क
पादशुश्रूषणे युक्तो राज्ञो मात्रोस्तथानय़ोः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति