menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धार्या चाभ्यनुज्ञाताः कृतपादाभिवन्दनाः |  ४८   क
जनन्या समुपाघ्राताः परिष्वक्ताश्च ते नृपम् |  ४८   ख
चक्रुः प्रदक्षिणं सर्वे वत्सा इव निवारणे ||  ४८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति