menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
न्याय़तः श्वशुरे वृत्तिं प्रय़ुज्य प्रय़युस्ततः |  ५०   क
श्वश्रूभ्यां समनुज्ञाताः परिष्वज्याभिनन्दिताः |  ५०   ख
सन्दिष्टाश्चेतिकर्तव्यं प्रय़युर्भर्तृभिः सह ||  ५०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति