वन पर्व  अध्याय ४४

वैशम्पाय़न उवाच

ततः पार्थो महावाहुरवतीर्य रथोत्तमात् |  १६   क
ददर्श साक्षाद्देवेन्द्रं पितरं पाकशासनम् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति