विराट पर्व  अध्याय ४४

कृप उवाच

एकेन हि त्वय़ा कर्ण किं नामेह कृतं पुरा |  १०   क
एकैकेन यथा तेषां भूमिपाला वशीकृताः ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति