विराट पर्व  अध्याय ४४

कृप उवाच

द्रोणो दुर्योधनो भीष्मो भवान्द्रौणिस्तथा वय़म् |  २०   क
सर्वे युध्यामहे पार्थं कर्ण मा साहसं कृथाः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति