menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
विराट पर्व
अध्याय ४४
chevron_left
chevron_right
कृप उवाच
परिचिन्त्य तु पार्थेन संनिपातो न नः क्षमः |  ५   क
एकः कुरूनभ्यरक्षदेकश्चाग्निमतर्पय़त् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति