उद्योग पर्व  अध्याय ४४

धृतराष्ट्र उवाच

सनत्सुजात यदिमां परार्थां; व्राह्मीं वाचं प्रवदसि विश्वरूपाम् |  १   क
परां हि कामेषु सुदुर्लभां कथां; तद्व्रूहि मे वाक्यमेतत्कुमार ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति