वन पर्व  अध्याय ६०

वृहदश्व उवाच

पर्याप्तः परिहासोऽय़मेतावान्पुरुषर्षभ |  ७   क
भीताहमस्मि दुर्धर्ष दर्शय़ात्मानमीश्वर ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति