भीष्म पर्व  अध्याय ४४

सञ्जय़ उवाच

सम्वभूवुरनीकेषु वहवो भैरवस्वनाः |  ४४   क
वर्तमाने महाभीमे तस्मिन्वीरवरक्षय़े ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति