वन पर्व  अध्याय १२९

लोमश उवाच

वेदी प्रजापतेरेषा समन्तात्पञ्चय़ोजना |  २२   क
कुरोर्वै यज्ञशीलस्य क्षेत्रमेतन्महात्मनः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति