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शल्य पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
कुन्दनं कुसुमं चैव कुमुदं च महाय़शाः |  ३५   क
डम्वराडम्वरौ चैव ददौ धाता महात्मने ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति