द्रोण पर्व  अध्याय १२०

सञ्जय़ उवाच

भूरिश्रवसि सङ्क्रान्ते परलोकाय़ भारत |  २   क
वासुदेवं महावाहुरर्जुनः समचूचुदत् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति