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शल्य पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
क्षेमवापः सुजातश्च सिद्धय़ात्रश्च भारत |  ६१   क
गोव्रजः कनकापीडो महापारिषदेश्वरः ||  ६१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति