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शल्य पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
यज्ञवाहः प्रवाहश्च देवय़ाजी च सोमपः |  ६५   क
सजालश्च महातेजाः क्रथक्राथौ च भारत ||  ६५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति