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शल्य पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
चीरसंवृतगात्राश्च तथा फलकवाससः |  ८८   क
नानावेषधराश्चैव चर्मवासस एव च ||  ८८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति