शल्य पर्व  अध्याय ४४

वैशम्पाय़न उवाच

त्रिशिखा द्विशिखाश्चैव तथा सप्तशिखाः परे |  ९०   क
शिखण्डिनो मुकुटिनो मुण्डाश्च जटिलास्तथा ||  ९०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति