आदि पर्व  अध्याय ४५

सूत उवाच

पदातिर्वद्धनिस्त्रिंशस्तताय़ुधकलापवान् |  २२   क
न चाससाद गहने मृगं नष्टं पिता तव ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति