आदि पर्व  अध्याय ४५

सूत उवाच

चातुर्वर्ण्यं स्वधर्मस्थं स कृत्वा पर्यरक्षत |  ७   क
धर्मतो धर्मविद्राजा धर्मो विग्रहवानिव ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति