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शान्ति पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
लव्धप्रशमनं कृत्वा स राजा राजसत्तम |  १०   क
युय़ुत्सोर्धार्तराष्ट्रस्य पूजां चक्रे महाय़शाः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति