अनुशासन पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

सर्वथा पार्थिवेनेह सततं भूतिमिच्छता |  ६५   क
भूर्देय़ा विधिवच्छक्र पात्रे सुखमभीप्सता ||  ६५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति