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अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
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युधिष्ठिर उवाच
कन्याय़ाः प्राप्तशुल्काय़ाः पतिश्चेन्नास्ति कश्चन |  १   क
तत्र का प्रतिपत्तिः स्यात्तन्मे व्रूहि पितामह ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति