आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४५

व्रह्मो उवाच

वुद्धिसारं मनस्तम्भमिन्द्रिय़ग्रामवन्धनम् |  १   क
महाभूतारविष्कम्भं निमेषपरिवेष्टनम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति