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विराट पर्व
अध्याय ३१
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा सुशर्माणं विव्याध दशभिः शरैः |  २२   क
पञ्चभिः पञ्चभिश्चास्य विव्याध चतुरो हय़ान् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति