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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
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नारद उवाच
दह्यत्सु मृगय़ूथेषु द्विजिह्वेषु समन्ततः |  २०   क
वराहाणां च यूथेषु संश्रय़त्सु जलाशय़ान् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति