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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
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नारद उवाच
तमुवाच किलोद्विग्नः सञ्जय़ो वदतां वरः |  २४   क
राजन्मृत्युरनिष्टोऽय़ं भविता ते वृथाग्निना ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति