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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
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युधिष्ठिर उवाच
अपि दृष्टस्त्वय़ा तत्र कुशली स कुरूद्वहः |  ७   क
गान्धारी च पृथा चैव सूतपुत्रश्च सञ्जय़ः ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति