सभा पर्व  अध्याय २८

वैशम्पाय़न उवाच

सहदेवस्तु धर्मात्मा सैन्यं दृष्ट्वा भय़ार्दितम् |  २६   क
परीतमग्निना राजन्नाकम्पत यथा गिरिः ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति