उद्योग पर्व  अध्याय ५७

धृतराष्ट्र उवाच

दुर्योधन निवर्तस्व युद्धाद्भरतसत्तम |  २   क
न हि युद्धं प्रशंसन्ति सर्वावस्थमरिन्दम ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति