सभा पर्व  अध्याय ४५

धृतराष्ट्र उवाच

दुर्योधन कुतोमूलं भृशमार्तोऽसि पुत्रक |  ६   क
श्रोतव्यश्चेन्मय़ा सोऽर्थो व्रूहि मे कुरुनन्दन ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति