वन पर्व  अध्याय ४५

वैशम्पाय़न उवाच

स तथेति प्रतिज्ञाय़ लोमशः सुमहातपाः |  ३७   क
काम्यकं वनमुद्दिश्य समुपाय़ान्महीतलम् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति