विराट पर्व  अध्याय ८

सुदेष्णो उवाच

सुकेशी सुस्तनी श्यामा पीनश्रोणिपय़ोधरा |  ११   क
तेन तेनैव सम्पन्ना काश्मीरीव तुरङ्गमा ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति