उद्योग पर्व  अध्याय ४५

सनत्सुजात उवाच

न साधुना नोत असाधुना वा; समानमेतद्दृश्यते मानुषेषु |  २०   क
समानमेतदमृतस्य विद्या; देवंय़ुक्तो मधु तद्वै परीप्सेत् |  २०   ख
योगिनस्तं प्रपश्यन्ति भगवन्तं सनातनम् ||  २०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति