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अनुशासन पर्व
अध्याय १३७
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भीष्म उवाच
स्ववित्तं तेन दत्तं तु दत्तात्रेय़ाय़ कारणे |  ५   क
क्षत्रधर्मं पुरस्कृत्य विनय़ं श्रुतमेव च ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति