menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय ४३
chevron_left
chevron_right
देवशर्मो उवाच
किं ते विपुल दृष्टं वै तस्मिन्नद्य महावने |  २   क
ते त्वा जानन्ति निपुण आत्मा च रुचिरेव च ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति