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भीष्म पर्व
अध्याय ४५
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सञ्जय़ उवाच
पाञ्चालानथ मत्स्यांश्च केकय़ांश्च प्रभद्रकान् |  ५४   क
भीष्मः प्रहरतां श्रेष्ठः पातय़ामास मार्गणैः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति