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कर्ण पर्व
अध्याय २४
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दुर्योधन उवाच
एकं च भगवन्तं ते नानारूपमकल्पय़न् |  ४१   क
आत्मनः प्रतिरूपाणि रूपाण्यथ महात्मनि |  ४१   ख
परस्परस्य चापश्यन्सर्वे परमविस्मिताः ||  ४१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति