आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७१

वैशम्पाय़न उवाच

स सम्भारान्समाहृत्य नृपो धर्मात्मजस्तदा |  ८   क
न्यवेदय़दमेय़ात्मा कृष्णद्वैपाय़नाय़ वै ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति