कर्ण पर्व  अध्याय ४५

सञ्जय़ उवाच

पाण्डवैस्तु महाराज धार्तराष्ट्री महाचमूः |  २२   क
पुनः पुनरथो वीरैरभज्यत जय़ोद्धतैः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति