menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
निपतद्भिर्गजै राजन्नरैश्चापि सहस्रशः |  ३८   क
रथैश्चापि नरव्याघ्र हय़ैश्चापि समन्ततः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति