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द्रोण पर्व
अध्याय १६९
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सञ्जय़ उवाच
याप्यस्त्वमसि पार्थैश्च सर्वैश्चान्धकवृष्णिभिः |  ११   क
यत्कर्म कलुषं कृत्वा श्लाघसे जनसंसदि ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति