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शल्य पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
खण्डखण्डा च राजेन्द्र पूषणा मणिकुण्डला |  २०   क
अमोचा चैव कौरव्य तथा लम्वपय़ोधरा ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति