शल्य पर्व  अध्याय ४५

वैशम्पाय़न उवाच

वेणुवीणाधरा चैव पिङ्गाक्षी लोहमेखला |  २१   क
शशोलूकमुखी कृष्णा खरजङ्घा महाजवा ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति